The Fact About Chamatkari Totke - यह लिखकर जेब में रख ले किसी मंत्र की जरूरत नहीं That No One Is Suggesting +91-9779942279




सुपरिचित साहित्यकार राजकुमार गौतम के ये व्यंग्य-रचनाएँ शहरी मध्यवर्ग के जिस वेतनभोगी संसार को हम पर खोलती है, उसकी त्रासदी को महज उसी तक सीमित रहकर नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसके लिए उसके बाहर आना होगा; क्योंकि उसके अंतर्सूत्र समूचे समाज में गूँथे हुए है । राजकुमार गौतम बहुत सहज भाव से इस सच्चाई की ओर संकेत करते चलते हैं । वे इन सूत्रों को एक ऐसी भाषा-शैली में उजागर करते है जो हमें अनायास ही हमारे साक्षात्कार तक पहुँचाने में समर्थ है ।

हिंदी में प्रति वर्ष एक हज़ार से अधिक पुस्तकें छपती  हैं, पर अभी तक कोई ऐसी पुस्तक मेरे देखने में नहीं  आई है जिससे जन-सामान्य को सहज-सरल भाषा में मानव अधिकार संबंधी जानकारी प्राप्त हो सके। हिंदी की इस कमी का ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक में मानव अधिकार की धारणा सहित अन्य विषयों के संबंध में भी चर्चा की गई है । 

ऋतुराज की कविता गरीब, वंचित, बहुत दूर रहने वाले लोगों की ताकत को रेखांकित करती है । वस्तुओं, लोगों और संवेदनाओं के 'आदिवास' के प्रति चिंता एक खोज और उसे बचाने की चिंता ऋतुराज की रचना में कई स्तरों पर व्यक्त होती रही है । बहुराष्ट्रीय  निगमों के इस साम्राज्यवादी समय में ज्यादातर लोग आशा और प्रसन्नता जैसी चीजों के लिए बाजार की तरफ देख रहे है और उसे खरीद लेने की सुख-भ्रांति में भी रह रहे हैं, लेकिन ऋतुराज के लिए वास्तविक उम्मीद बाजार से बाहर घटित होती है। वह बाजार विरोधी है और समाज के अत्यंत साधारण मनुष्यों, गरीब आदिवासियों के भीतर निवास करती है ।

कविता का लोकरंग विस्थापन का प्रतिवाद है। स्थानीयता नीलेश की काव्यात्मकता का मुख्य ध्रुवक है। गंजबासौदा की धूल भी नीलेश के लिए कविता है। यह कविता का प्रकृत देशज ठाठ है। खुद से भिड़ने की ताकत।

इस सीरीज़ के अत्यंत महत्त्वपूर्ण कथाकार अखिलेश ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है वे हैं-चिट्ठी, more info शापग्रस्त, बायोडाटा, ऊसर, पाताल, मुहब्बत, जलडमरूमध्य, वजूद, शृंखला तथा अँधेरा । 

‘अरे बिटिया, चाय तो पीती जाओ।’ जज साहब की पत्नी बोलीं। गृहिणियों को हमेषा मेहमानों को खिलाने पिलाने की ही पड़ी रहती है, और बातों से उन्हें कोई सरोकार नहीं होता, पर जज साहब मेरी बात समझ रहे थे। दोनों भाई मेरे साथ ही उठ खड़े हुए और मुझे छोड़ने बाहर तक आए।

‘दस प्रतिनिधि कहानियां’ सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिंदी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है।

हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक सूर्यबाला की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

रवीन्द्रनाथ ठाकुर की ये सभी कहानियां बहुत प्रसिद्ध  हैं। कहना तो यह भी उचित होगा कि अनेक रचनाकारों ने इनके छाया-अर्थ से स्वयं को समृद्ध किया है। एक रात, काबुलीवाला, पोस्टमास्टर, क्षुधित पाषाण और समाप्ति आदि कहानियों के नाट्य रूपांतर से पाठकों और रंगकर्मियों को कुछ सार्थक विकल्प मिलेंगे। प्रताप सहगल ने कहानियों में निहित नाट्य स्थितियों और रंग- संभावनाओं को समझते हुए रूपांतर को समृद्ध किया है।

भगवान सिंह ने कविता, कहानी, व्यंग्य, आलोचना, उपन्यास, भाषा-समस्या जिस भी विषय पर लिखा है, उसमें उनका एक नया तेवर रहा है। उनका एक उपन्यास तो हिंदी के सबसे चर्चित और विवादित उपन्यासों में आता है। परंतु इतिहास पर उनका लेखन जितना विचारोत्तेजक और क्रांतिकारी माना गया है, उसकी तुलना उनके अन्य किसी विधा में किए गए लेखन से नहीं की जा सकती। व्यावसायिक इतिहासकार न होते हुए भी उन्होंने प्राचीन इतिहास की जड़ीभूत मान्यताओं को खंडित करते हुए इसकी गहनता, व्याप्ति और दिशा सभी को बदला है और इतिहासकारों, पुरातत्त्वविदों और मनस्वी पाठकों के बीच उसका स्वागत हुआ है।

‘दस प्रतिनिधि कहानियां’ सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिंदी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है।

Benaras – A town so attractive, even the Ganges transformed system and flowed north to be able to swing by it. Lord Shiva Found this attractive city on the information of his trident, and arrived in this article to live the life of a householder with his spouse. He is from the quite spirit and really soul of the town. With Moksha promised to those that die in this article, Benarasis, it is said, wish to make the most of their past lifestyle on the planet.

नीलेश रघुवंशी ‘घर निकासी’ में प्रगीतात्मकता का सार्थक उपयोग कर सकीं। ‘पानी का स्वाद’ की कविताओं में काव्य फलक का विस्तार दिखा। ‘अंतिम पंक्ति’ की आधी कविताएँ आख्यानमूलक हैं। कहीं लैंडस्केप, कहीं दृष्य.श्रव्य का कोलाज, कहीं कथा.कहानी।

यह कहानी-संग्रह नए कथा क्षेत्र में सादगी, विस्तार और अनुपम अनुभवों से हमें संपन्न बनाता है।

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